गणेश जी को शिव जी द्वारा एक वरदान प्राप्त हुआ की धरती पर जब भी कोई शुभ कार्य किया जायगा तो सबसे पहले तुम्हारी पूजा होगी जाने पूरी कथा। 

जाने क्यों गणेश जी की पूजा की जाती है सबसे पहले। 

एक बार समस्त देवी देवताओं में इस बात को लेके चर्चा हो रही थी की किस भगवान को सबसे पहले धरती पर पूजा जाये। सभी भगवानो की बढ़ती चिंता देख एक दिन नारद जी शिव जी के पास पहुंचे और उन्हें इस समस्या के बारे में बताया।

यह सुनकर शिव जी सभी देवताओ से बोले जो इस ब्राह्मण का चक्कर सबसे पहले लगायगा अपने वाहनों पर उसे ही धरती पर सबसे पहले पूजा जायगा। यह सुनकर कार्तिकेय भगवान बोले यह कैसे संभव है की गणेश अपनी सवारी मूषक पर बैठ धरती का चक्कर लगाए इस में तो काफी समय लग जायगा किन्तु शिव जी ने बोला की इस प्रतियोगिता को शुरू किया जाये। अपने पिता शिव जी के आदेश स्वरुप कार्तिकेय भगवान् अपनी सवारी मोर पर बैठ ब्राह्मण का चक्कर लगाने निकल गए परन्तु गणेश जी अपने माता पिता के पास पहुंचे और उनकी परिक्रमा कर भक्ति भाव से हाथ जोड़ कर खड़े हो गए। जब कार्तिकेय अपने मोर पर सवार होक लोटे तो बोले मै सबसे पहले धरती का चक्कर लगा कर आया हु तो धरती पर सबसे पहले मेरी पूजा होगी।

शिव जी प्रेम से खड़े हुए और कार्तिके से बोले की तुमसे पहले गणेश जी ने पृथ्वी का चक्कर लगा लिया है। अर्थात जिसने अपने माता पिता की परिक्रमा कर ली उसने ब्राह्मण का चक्कर लगा लिया। गणेश जी की चतुराई व भक्ति देख शिव जी ने उन्हें वरदान दिया की धरती पर किसी भी प्रकार की पूजा, हवन या कोई भी शुभ कार्य के आरम्भ में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जायगी।

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