विशेष योग में बन रहा है करवाचौथ का सयोंग। इन सावधानियों का रखे व्रत में ध्यान। 

भारतीय संस्कृति में करवाचौथ का व्रत बेहद महत्वपूर्ण है। यह व्रत उत्तर भारत में प्रमुखता के साथ मनाया जाता है। हालाँकि अब देखा देखि अब पूरे भारत में मनाया जाने लगा है। इस दिन सुहागन स्त्रियाँ अपने पति की लम्बी उम्र की कामना के लिए इस व्रत को रखती है। इस साल यह व्रत 27अक्टूबर 2018 को मनाया जायगा। इस बार तारा डूबने के कारण और शनिवार के दिन कार्तिक चतुर्दशी होने से इस व्रत के बेहद ख़ास मायने है। महाभारत काल में द्रौपदी जब पांच पांडवो के साथ युद्ध स्थल पर थी तब उन्होंने भगवान् कृष्ण से अपने पतियों की लम्बी आयु के लिए विनती की तब श्री कृष्ण ने द्रौपदी को कार्तिकेय मॉस की चतुर्दशी पर इस व्रत को करने का विधान बताया। इस व्रत में शिव पारवती की कार्तिकेय व गणेश जी के साथ पूजा का विधान बताया गया है। इस व्रत को करने से जिस प्रकार माँ पारवती ने कठोर तप से शिव जी का वरण किया था उसी प्रकार निर्जला उपवास रखकर स्त्रिया अपने पति की लम्बी आयु व संपन्न गृहस्थ जीवन की मनोकामना करती है। इस दिन सुहागने सुबह सूर्योदय से पहले नाहा धोकर सोलह श्रृंगार करके माँ पारवती का ध्यान करके करवा चौथ के व्रत का संकल्प करती है। इस संकल्प के बाद कुछ भोजन इत्यादि करके पूरा दिन निर्जला रहते हुए रात्रि में छन्नी में देखते हुए मिट्टी के कर्वे से अर्क देकर व्रत पूरा करती है। शाम के समय माँ गौरी की गोद में बैठे गणेश जी की पूजा अर्चना करके कथा सुनती है और योग्य स्त्री को करवा के पूजा की थाली भेट स्वरुप देती है। 

तारा डूबने और शनिवार होने के कारण यह व्रत इस साल तनाव पूर्ण स्तिथिया उतपन्न करेगा। दूसरा इस संयोग के कारण आग लगने की घटना भी अधिक हो सकती है और स्त्रियों के स्वस्थ्य पर भी असर देखने को मिलेगा। इन सवेंदनशील स्थितियों से बचने के उपाय ज़रूर करे। 

  • मन को शांत रखे। 
  •  किसी भी लड़ाई झगडे को उग्र रूप ना लेने दे। 
  •  दिया जलाते समय या काम करते समय आग से सावधानी रखे। 
  •  स्वस्थ्य को ध्यान रखते हुए सरगी में किसी भी प्रकार की चॉकलेट का प्रयोग आवश्य करे। 
  • ॐ मंत्र का जाप, विशेष फलदायी होगा। 

इस दिन काले नीले व बुरे रंग के कपड़ो का प्रयोग से बचे। लाल और गुलाबी रंग शुभ मने जाते है इनमे भी लाल रंग अत्यधिक  लाभदायी होते है क्योकि लाल रंग उत्साह और जोश से भरपूर होता है और मांगलिक कार्यो में शुभता का प्रतीक होता है। 

इस दिन रूठे लोगो को मनाना।, सोये हुए लोगो को जगाना।, कैंची व चाक़ू से कुछ भी काटना।, सुई धागे से सिलाई करना वर्जित है। 

भगवान आपकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हुए व्रत को सफल बनाये।