गणेश जी की आरती: पूर्ण विधि जिससे पूरी होंगी मनोकामनाएं। 

गणपति महाराज भगवान शिव और माँ पारवती के पुत्र है। एक पौराणिक कथा के अनुसार गणेश जी की पूजा सबसे पहले की जाती है। किसी भी शुभ कार्य में गणेश जी को सबसे पहले आमंत्रित किया जाता है क्योकि उनके अनेक नामो में से एक विघ्नहर्ता भी है अर्थात जो सारे विघ्न हर ले। 

गणपति जी की आरती यदि सही तरीके से की जाये तो बेहद अच्छे परिणाम मिलते है और मनोकामनाएं जल्द ही पूरी होती है। 

गणपति जी की आरती की पूर्ण विधि। 

गणपति जी की आरती करते समय अपने मन को शांनत रखे और विघ्नहर्ता को मन में याद करते हुए तीन बार हलकी आवाज़ से ऊँची आवाज़ करते हुए शंख बजाये। 

देसी घी का दिया जलाये। तेल का दिया कोशिश करे ना जलाये। दिए में एक बत्ती (रुई की ज्योत) जलाये। घी ना हो तो कपूर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। 

गणपति जी की आरती करते समय पूर्ण श्रद्धा से उनका ध्यान लगाए व आरती गाते हुए हलके हाथो से तालियाँ बजाये। 

ध्यान रहे आरती घडी की सुई के अनुसार (Clockwise) ही करे। 

Ganesh Ji Ki Aarti गणेश जी की आरती।  

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ जय...


एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।

माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ॥ जय...


अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय...


पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा।

लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥ जय...


'सूर' श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ॥ जय...


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