दीपावाली का त्यौहार हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है। विजयदशमी के दिन बुरायिओं पर विजय पाकर रावण का वध कर प्रभु श्री राम अपना 14 वर्षो का वनवास पूर्ण कर अयोध्या पहुंचे और इस ख़ुशी में अयोध्यावासियों ने घर घर दीप प्रज्वलित किये और एक दूसरे को मिठाइयाँ बाँट कर प्रभु श्री राम का स्वागत किया। 


क्यों होती है दिवाली पर लक्ष्मी पूजन?
कार्तिक मास की अमावस पर देवताओ और दानवो के बीच होने वाले युद्ध की समाप्ति पर समुंद्र मंथन में माँ लक्ष्मी अमृत कलश के साथ समुंद्र से धरती पर प्रकट हुई। माना जाता है की इस दिन माँ लक्ष्मी धरती पर विचरण करती है और माँ लक्ष्मी सदैव स्वच्छ व सुन्दर स्थान पर विराजती है इसलिए आज भी दिवाली पर सभी अपने घर व कार्य स्थल को साफ़ सुथरा रखते है और गेंदे के फूल और अशोक के पत्तो से सजावट करते है और दीपको से अमावस की रात को जगमगाती रौशनी से नहलाते है। 

इस दिन हर घर में लक्ष्मी व गणेश जी का आवाहन करके उनकी पूजा अर्चना की जाती है व उनसे अपने घर विराजमान होने के लिए निवेदन किया जाता है।  सभी लोग नए कपडे पहन कर एक दूसरे को मिठाइयां व उपहार देते है और हर्ष और उल्लास के साथ दिवाली  मनाते है। 

इस तरह करे दिवाली पर दिवाली पूजन। 

दिवाली पूजन एक ख़ास महूरत में करने से बेहद अच्छे फल प्राप्त होते है। दीवाली पूजन का सही समय प्रदोष काल के समय होता है जो की एक स्थिर लग्न माना जाता है। 2018 में दीवाली पूजा का समय शाम 5:57 से 7:53 का है। 

दिवाली पूजा की विधि। 

लक्ष्मी पूजन में माँ लक्ष्मी जी के साथ साथ श्री गणेश जी की भी पूजा का विधान है। श्री गणेश बुद्धि के देवता है और विघ्नहर्ता है। जब तक इंसान में सोचने समझने की शक्ति ना हो और विघ्न दूर ना हो तब तक माँ लक्ष्मी का वास होना संभव नहीं है और पौराणिक कथाओ के अनुसार किसी भी शुभ कार्य से पहले श्री गणेश जी की पूजा करना अति आवश्यक है। 

सबसे पहले गणेश जी की और माँ लक्ष्मी की प्रतिमा को एक पटरी पर लाल कपड़ा बिछा कर विराजमान कराये। 

  • लक्ष्मी गणेश जी का ध्यान करे। 
  • लक्ष्मी गणेश जी का आवाहन करे। 
  • लक्ष्मी गणेश जी को पुष्प अर्पित करे। 
  • लक्ष्मी गणेश जी का हाथ जोड़ कर स्वागत करे। 
  • लक्ष्मी गणेश जी के चरणों को जल से धोये। 
  • लक्ष्मी गणेश जी का जल, चन्दन, फल, फूल व चावल से अभिषेक करे। 
  • लक्ष्मी गणेश जी को जल से स्नान कराये।  
  • लक्ष्मी गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराये।  
  • लक्ष्मी गणेश जी को इत्र से स्नान कराये।  
  • लक्ष्मी गणेश जी को गंगा जल से स्नान कराये। 
  • लक्ष्मी गणेश जी को वस्त्र रुपी मोली अर्पित करे।
  • लक्ष्मी गणेश जी को दूध और शहद अर्पित करे।  
  • लक्ष्मी गणेश जी को लाल चन्दन अर्पित करे।
  • गणेश जी को रोली से तिलक करे। 
  • लक्ष्मी जी को कुमकुम से तिलक करे। 
  • लक्ष्मी गणेश जी को  साबुत चावल अर्पित करे।
  • लक्ष्मी गणेश जी को पुष्प अर्पित करे।  
  • लक्ष्मी जी की अंग पूजन करे और अपने उलटे हाथ में पुष्प लेके माता को अर्पित करे। 
  • लक्ष्मी जी की अष्ट सिद्धि की पूजा करे और अपने बाये हाथ में साबुत चावल व पुष्प लेकर माता को अर्पित करे। 
  • अष्ट लक्ष्मी की पूजा करे और अपने बाये हाथ में साबुत चावल, पुष्प व चंदन माता को अर्पित करे।
  • लक्ष्मी गणेश जी को धूप दिखाए।  
  • लक्ष्मी गणेश जी को दीप दिखाए।
  • लक्ष्मी गणेश जी को मीठे का भोग लगाए।  
  • लक्ष्मी गणेश जी को जल अर्पित करे।    
  • लक्ष्मी गणेश जी को पान अर्पित करे। 
  • लक्ष्मी गणेश जी के आगे दक्षिणा सेहत माथा टेके। 
  • लक्ष्मी गणेश जी की वंदना करे।  
  • लक्ष्मी गणेश जी से क्षमा प्राथना करे और कोई भूल हो गयी हो तो उसके लिए माफ़ी मांगे।  

यदि आप माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा पाना चाहते है तो 21 माला इस मंत्र की दिवाली के दिन करे और रोज़ाना 1 माला उत्तर दिशा की तरफ मुँह करके करे। 
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलाये प्रसिद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मे नमः  

आप इस प्रकार से माँ लक्ष्मी और गणेश जी को प्रसन्न कर सकते है और माँ लक्ष्मी को अपने घर विराजमान होने के लिए निवेदन कर सकते है।