श्री किलकारी भैरव नाथ मंदिर, पुराना किला- नई  दिल्ली 

भैरव नाथ महाराज जिन्हे देव भूमि काशी का कोतवाल भी कहा गया है वह भगवन शिव के गण और माँ पारवती के अनुचर है। भैरव का अर्थ है भय का हरण करने वाला। भैरव नाथ महाराज तीनो देव ब्रह्मा, विष्णु और महेश की शक्तिया अपने अंदर समाये बैठे है। माना जाता है भैरव नाथ की सिद्धि बेहद कठिन होती है परंतु  जो व्यक्ति  भैरव नाथ की सिद्धि प्राप्त कर ले उसका जीवन समझो धन्य हो गया। 

श्री किलकारी भैरव मंदिर का इतिहास। 

महाभारत के समय पांडव जब यज्ञ करते थे तभी सभी दैत्य यज्ञ को भंग करने आ जाते और पांडवो को बेहद परेशान करते। यह देख भीम ने बाकि भाईओ से वादा किया की वह भैरव जी को लेके आयंगे जिससे यह सभी दैत्य यहाँ से भाग खड़े होंगे। भीम वादा करके जब भैरव जी के पास पहुंचे तभी भैरव जी ने भीम के आगे एक शर्त रखी की मै तभी तुम्हारे साथ चलूँगा जब तुम मुझे अपनी पीठ पर बिठा कर ले जाओग और रास्ते में यदि तुम कही रुक गए तो वह उससे आगे नहीं जायेंगे। भीम ने यह शर्त स्वीकार की और भैरव नाथ जी को अपनी पीठ पर बिठा निकल पड़े परन्तु दिल्ली के पुराने किले तक पहुँच कर भीम थक गए और रुक गए और शर्त के मुताबिक़ भैरव जी बोले की वह इससे आगे नहीं जायँगे। 

भीम ने भैरव जी को बोला की वह पांडवो को वादा करके आये है की मै आपको लेकर आऊंगा और आप सभी दैत्यों को यहाँ से दूर करेंगे परन्तु आप मेरे साथ आगे नहीं गए तो मै असफल हो जाऊंगा यह सुनकर भैरव जी बोले मै यही से तुम्हारा काम करदूंगा और जोर से किलकारी मारी जिसे सुनकर अधिकतर दैत्य वही प्राण त्याग गए और बाकी वहा से भाग खड़े हुए। 

उसी दिन से उस जगह का नाम "श्री किलकारी बाबा भैरो नाथ जी पांडवो कालीन मंदिर" पडा और भीम ने वहां भैरो नाथ जी का विशाल मंदिर का निर्माण करवाया। 

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तांत्रिको के बीच प्रसिद्द है श्री किलकारी भैरव मंदिर। 
तंत्र विद्या में भैरो नाथ जी का विशेष स्थान है। यहाँ साल भर तांत्रिको का ताँता लगा रहता है जो की भैरव नाथ जी की सिद्धि प्राप्त करने का प्रयत्न करते है व कुछ अपने यजमानो की पूजा करवाते है। यहाँ हर शनिवार व रविवार को तांत्रिको को मंदिर परिसर में देखा जा सकता है। 

क्या चढ़ता है श्री किलकारी भैरव को भोग?
बाबा भैरो नाथ जी को इस मंदिर में शराब का भोग लगाया जाता है। भक्त बेहद श्रद्धा से शराब लेकर आते है और बाबा को भोग लगाते है। यहाँ एक ज्वाला भी जलती है जिसमे तेल या घी नहीं बल्कि शराब डालके उसे प्रज्वलित रखा जाता है। 


ध्यान दे - यदि आप बाबा को शराब का भोग लगाना चाहते है तो आप वह बहार से ले कर आये, मंदिर में इसकी कोई वयस्था नहीं है। 

 

किन लोगो को ज़रूर आना चाहिए इस मंदिर में?
वैसे तो भगवान के आगे हर व्यक्ति को सर झुकाने आना चाहिए परन्तु जिन लोगो को कोई ऊपरी बाधा सता रहीं हो या काम काज में परेशानी हो तो उन्हें बाबा की शरण में निश्चित रूप से आना चाहिए और उनकी आराधना करनी चाहिए। 

कैसे होते है बाबा प्रसन्न?
यदि आप भैरव नाथ जी को प्रसन्न करना चाहते है तो बाबा के मंदिर में शनिवार को चार मुखी दीपक जलाये और उड़द की दाल के भल्लो का और शराब का भोग लगाए। कुछ भक्त जो शराब का सेवन  नहीं करते वह दूध का भी भोग लगा सकते है। 

भैरव नाथ जी की सवारी। 
बाबा भैरव नाथ जी की सवारी है कुत्ते। आप मंदिर परिसर में बहुत सारे कुत्तो को देख सकते है यहाँ तक की मंदिर के कक्ष में जहा भैरव नाथ जी ने स्थान लिया है वहां भी कुत्ते हमेशा बैठे देखे जा सकते है  व मंदिर के बहार भी काले कुत्तो की बड़ी सी प्रतिमा दोनों तरफ बानी हुई है। 

कहा है मंदिर?
श्री किलकारी बाबा भैरो नाथ जी पांडवो कालीन मंदिर दिल्ली के पुराने किले के पीछे स्तिथ है। यह मंदिर प्रगति मैदान के गेट नंबर 1 के सामने है व सबसे नज़दीकी मेट्रो स्टेशन भी प्रगति मैदान का ही पड़ता है। 

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